Food License


1. खाद्य पदार्थ -
(पी.एफ.ए. एक्ट 1954 एवं एम.पी.एफ.ए. रूल 1962 के रूल 5 के अंतर्गत)

2. भयप्रद -
(नगरपालिक निगम उज्जैन भयप्रद एवं उद्वेजक व्यापार एवं कारखाना परिसर अनुज्ञापन उपविधियां 1978 (1) 4 के अंतर्गत)

3. वनस्पति -
(उज्जैन नगरपालिक निगम व्हेजीटेबल तेल उत्पादन एवं विनियम 340, 577 के अंतर्गत)

4. सराय, धर्मषाला,लॉज एवं परिसर -
(धर्मषाला व सराय एवं परिसर के निरीक्षण व नियमन संबंधी उपविधियां 1958 के अधीन)

5. सिनेमा -
(सिनेमा थियेटर व सार्वजनिक मनोरंजन अनुज्ञापन उपविधियां 1982 के अधीन)

6. मांस बाजार, दुकान तथा चैकियां -
(उपविधियां 1960 के अंतर्गत)

7. व्यवसाय का स्वरूप -
विक्रयार्थ, निर्माण/थोक/फुटकर/विक्रय/संग्रह वितरण

8. अनुज्ञा पत्र की अवधि -
अनुज्ञा पत्र प्रथम अनुज्ञा पत्र जारी दिनांक से आगामी 31 मार्च तक प्रभावषील रहता है।

9. अनुज्ञा पत्र प्रत्येक वर्ष नवीनीकरण के समय नियत आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत करने पर ही अनुज्ञा पत्र का नवीनीकरण किया जावेगा।

खाद्य पदार्थ अनुज्ञा पत्र
नियम एवं शर्ते

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1854 के नियम 49 व 50 एवं म. प्र. खाद्य अपमिश्रण निवारण नियम 1962 के रूल 5 के प्रावधानों तथा उसके अंतर्गत निर्मित नियमों एवं शर्तों के साथ साथ खाद्य पदार्थ अनुज्ञा पत्र (लायसेंस) प्रिवेंषन आॅफ फूड एडल्ट्रेषन एक्ट 1954 (1954 का 37) के प्रावधानों तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों का पालन और निम्नांकित शर्तों के साथ जारी किया जाता है -

1. अनुज्ञा पत्र गृहिता उनके प्रतिनिधि (एजेण्ट) और या कोई व्यक्ति जो उसकी सेवा में हो, का कर्तव्य होगा कि वह खाद्य निरीक्षक या अनुज्ञा पत्र दायक प्राधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी के पूछने पर उस व्यक्ति और स्थान का पूरा विवरण देगा जहाॅं से खा़द्य पदार्थ लाया है और विक्रय के लिए निर्माण, संग्रह या वितरण का प्रदर्षन या प्रदर्षित करता है।

2. अनुज्ञा पत्र गृहिता सदैव अपना सामान ऐसे स्थान से प्राप्त करेगा जो स्वच्छता की दृष्टि से आपत्तिजनक न हो। उसका कर्तव्य होगा कि वह सदैव खाद्य निरीक्षक, अनुज्ञा-पत्र दायक प्राधिकारी या स्वास्थ्य अधिकारी को ऐसे स्थान के निरीक्षण के उद्देष्य से प्रवेष करने की अनुमति दें।

3. अनुज्ञा पत्र गृहिता किसी भी समय अनुज्ञा पत्र की अवधि में अनुज्ञा पत्र की शतों के प्रतिकूल किसी खा़द्य पदार्थ का निर्माण, विक्रय, संग्रह या वितरण नही करेगा।

4. (अ) अनुज्ञा पत्र गृहिता को अनिवार्य होगा कि वर्ष में कम से कम दो बार दीवारों के भीतर, सतह के प्रत्येक भाग और प्रत्येक कमरे की छत या जिसमें खाद्य पदार्थ का निर्माण, विक्रय, संग्रह या वितरण उसके द्वारा किया जाता हो, संपूर्ण रूप से सफेदी करवाए या इसके अधिक बार यदि निरीक्षक के लिए अधिकृत व्यक्ति द्वारा जैसा चाहा जावें।

(ब) अनुज्ञा पत्र गृहिता का यह भी कर्तव्य होगा कि वह प्रत्येक कमरे या स्थान के पृथ्वी तल के प्रत्येक भाग में उपयुक्त अप्रेवषीय वस्तु से फर्ष बैठावें या ऐसा ढाल दे जो जब सफाई या धुलाई हो सकल जल निकास व्यवस्था को निष्चित करें।

(स) अनुज्ञा पत्र गृहिता का यह भी कर्तव्य होगा कि वह प्रत्येक कमरे या स्थान के फर्ष और मोरी तथा प्रत्येक काउण्टर, अलमारी, सोफा या बेंच जिसपर अनुज्ञप्ति पदार्थ से रखे हुए बर्तन रखे जाते हो, को प्रतिदिन धोवें और पूरी तरह से साफ करें।

5. अनुज्ञा पत्र गृहिता को अनिवार्य होगा कि प्रत्येक बर्तन जो उसके संस्थापन में अनुज्ञप्ति पदार्थों के संग्रह या वितरण के उपयोग में आते हो, उन्हे उपयोग में लेने के पूर्व तथा पष्चात में पूरी तरह से शुद्ध करने के लिये गरम पानी से धोवें।

6. अनुज्ञा पत्र गृहिता पीने के लिये बर्तनों को धोने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के नल (मेन) से आने वाले पानी या ऐसे स्त्रोतों से जिसे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी या स्थानीय प्राधिकारी पूर्व में अनुमोदित कर चुके हो, के अतिरिक्त किसी अन्य पानी का उपयोग नही करेगा।

7. जो भी काउण्टर या मैज निर्माण के विक्रय या संग्रह वितरण के बर्तन रखने के उपयोग में लाई जावे जिसे शीट से या अन्य उपयुक्त उप्रवेषी वस्तुत में जो सरलता से धोई और शुद्ध की जा सके, ढांकना अनिवार्य होगा।

8. दीवालें चिकनी होना चाहिये और फर्ष से पांच फीट की उंचाई तक सीमेंट या चिकने टाईल्स से अप्रेवेषीय होनी चाहिये।

9. अनुज्ञा पत्र के केवल अनुज्ञा पत्र में दिए भू-गृहादि, गोडाउन या स्थान (या फेरी विक्रेता के क्षेत्र) के लिए ही वैद्य होगा।

10. यदि अनुज्ञा पत्र गृहिता उस भू-गृहादि के लिए अनुज्ञा पत्र प्रदान किया गया है अनुज्ञा पत्र की अवधि में छोड़ता या बदलता हो, तो उसे अनुज्ञा पत्र प्राधिकारी को वैसी सूचना तुरन्त देना चाहिए।

11. अनुज्ञा पत्र गृहिता का कर्तव्य होगा िकवह अनुज्ञा पत्र को भू-गृहादि, गोडाउन का स्थान जिसे कि अनुज्ञा पत्र प्रदान किया गया है किसी स्पष्ट दिखाने वाले भाग में प्रदर्षित करें।

12. अनुज्ञा पत्र गृहिता एक ही भू-गृहादि में जिसके लिए अनुज्ञा पत्र दिया गया है, दोनों खाने योग्य और न खाने योग्य तेलों का विक्रय या वितरण नहीं करेगा।

13. होटलों पर मिठाई, नमकीन, भोजन, चाय, काॅफी, दूध आदि खाद्य एवं पेय पदार्थ प्रतिदिन ताजा बनाया जावें। जो मिठाईयां, नमकीन आदि खाद्य एवं पेय पदार्थ अच्छी स्थिति में स्टोर की जा सकती है उनका रख-रखाव नियमानुसार किया जावे। बाॅसी व खराब होने वाली वस्तुएं होटलों में बिल्कुल न रखी जावें।

14. सभी खाने की वस्तुओं को हवादार जाली से ढंककर रखी जावे। खाद्य पदार्थ खुले बिल्कुल नही रखे जावें।

15. होटल के नौकरों के पहनने के कपड़े साफ होना चाहिए जो नौकर झूठे बर्तन उठाएगा वह नौकर ग्राहकों को पानी व खाने की वस्तुएं सप्लाय नहीं करेगा।

16. होटल स्वच्छ हो, वहां मक्खियां न होने पावे।

17. संस्थान के कार्यरत किसी कर्मचारी या कार्य करने वाले व्यक्ति चर्मरोग से ग्रसित नहीं होना चाहिये जिसकी मेडिकल जांच कराकर प्रमाण पत्र प्राप्त करें।

18. पीने के पानी का विषेष ध्यान रखा जावे, टंकी को प्रतिदिन साफ करें और उसमें रोजाना कीटनाषक दवा जैसे क्लोरिन या पोटेषियम परमेगनेट डाला जावे।

19. संस्थान से निकला पदार्थ व्यर्थ कचरे को एक ढक्कनदार डिब्बे में एकत्रित किया जावे जिस पर कचरा पेटी अंकित किया जावें।

20. संस्थान के सह गौचर भाग में सूचना पट के माध्यम से निर्मित खाद्य पदार्थ किस घी अथवा खाद्य तेल से बनाया जाता है, का अंकन करा जावें।

21. विक्रयार्थ खाद्य पदार्थ तथा उनके निर्माण संबंधी प्रक्रिया को दुकान के आगे अथवा नाले, नाली के पास नहीं रखा जावें ताकि खाद्य पदार्थ दूषित न होने पाए।

मांस बाजार दुकान तथा चैकियां अनुमति पत्र
नियम एवं शर्ते

मध्यभारत नगरपालिका विधान, सन 1954 (क्र. 1 सन 1954) की धारा 46 की उप-धारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य शासन उक्त विधान की धारा 46 की उप-धारा (1) के चरण (क) तथा धारा 82 के अधीन बृहत नगरपालिका उज्जैन द्वारा बनाई गई मांस बाजार दुकान तथा चैकियों (नियमन) उप-विधियां, 1960 की स्वीकृति प्रदान करता है, जिनका प्रकाषन उक्त विधान की धारा 46 की उप-धारा (2)

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